Morley- Minto reform 1909 | मार्ले मिंटो सुधार 1909 । POLITY IN HINDI

NCERT INDIAN POLITY HINDI NOTES


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Morley- Minto reform 1909 | मार्ले मिंटो सुधार 1909 


                                         

भारत परिषद अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक अधिनियम था, जिसका प्रमुख लक्ष्य भारत में स्वशासित शासन प्रणाली स्थापित करना था । इस समय

भारतीय वायसराय- लॉर्ड मिंटो 

भारतीय सचिव- जॉन मार्ले  


                                       



Important point |महत्वपूर्ण बिंदु- 


● इस अधिनियम का नाम मार्ले मिंटो इसलिए पड़ा क्योंकि इस समय भारत के वायसराय लॉर्ड मिंटो थे और UK में भारतीय सचिवालय के मुख्य जॉन मार्ले थे । 

● यह अधिनियम जॉर्ज अरुंडेल समिति की सिफारिश से लाया गया था । 


Reason |कारण-  


● 1905 का बंगाल विभाजन ।

● इंडियन नेशनल कांग्रेस द्वारा होमरुल की मांग ।

● 1996 मुस्लिम लीग की ढ़ाका मे स्थापना ।

(होमरूल इसमें सरकार से कहा गया कि जो हमारे लोकल मुद्दे हैं या स्थानीय सरकार है उसे चलाने का पूरा अधिकार हमें दिया जाए)


Feature of morle-minto reform | प्रावधान व महत्त्व-


● वायसराय की कार्यकारी परिषद में पहली बार भारतीय को प्रवेश दिया गया और पहले भारतीय सतेंद्र प्रसाद सिन्हा को विधि सदस्य के रूप में चुना गया ।


● केंद्रीय विधान परिषद में संख्या को 16 से बढ़ाकर 60 किया गया । जिन्हें 32 गैर सरकारी सदस्य थे बड़े प्रांतों की काउंसिल में सदस्यों की संख्या 50 और छोटे प्रांतों की काउंसिल मे लोगों की संख्या 30 निर्धारित की गई ।


● इस अधिनियम द्वारा केंद्रीय कार्यकारिणी परिषदों में पहली बार भारतीयों को अधिकार मिला । बंबई और मद्रास प्रांतों के कार्यकारिणी परिषदों की संख्या बढ़ाकर 4-4 कर दी गई ।


● भारतीय सचिव की परिषद जो UK में थी । इसमें पहली बार भारतीयों को जगह दी गई और पहली बार दो भारतीय 'के जी गुप्ता और सैयद हुसैन बिलग्रामी' को रखा गया ।


● बजट बहस करने की अनुमति तो पहले से थी, परंतु अब पूरक प्रश्न करने मतदान करने और प्रस्ताव पेश करने का अनुमति भी दी गई।


● पहली बार चुनाव के प्रावधान की व्यवस्था की गई थी, परंतु यह मताधिकार सीमित था ।


● मिंटो द्वारा संप्रदायिक प्रतिनिधित्व या निर्वाचक मंडल द्वारा 'फूट डालो राज करने की नीति' अपनाई गई ।


होना यह था कि केंद्रीय परिषद के 60 सदस्यों के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव होना था और ये 60 सदस्य स्थानीय निकाय प्रांतीय परिषदों और अन्य मध्य प्रांतों से चुने जाने थे ।

परंतु मिंटो ने दूसरा ही दिमाग लगाया और उसने सांप्रदायिक निर्वाचन को जन्म दिया । उसने 60 सीटों में से 20 सीटें मुसलमानों के लिए अलग की और इन 20 सीटों पर चुनाव सिर्फ मुस्लिम लड़ेंगे और वोट भी मुस्लिम ही देंगे ।


Note - 

● इसी वजह से मिन्टों को सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक कहा जाता है ।

● इस अधिनियम को उद्धार निरंकुशता वाला अधिनियम कहा जाता है ।


Decision परिणाम -

● कांग्रेस की स्वशासन की मांगों को ठुकरा दिया गया ।

● मार्ले ने भारत में संसदीय शासन व्यवस्था स्थापना का स्पष्ट विरोध किया ।

● भारतीय एकता को नुकसान पहुंचा और मताधिकार प्रणाली भेदभाव पूर्ण थी ।



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