हेल्लो दोस्तों स्वागत है आप सभी का ,उम्मीद है आप अब अच्छे होगे और अच्छे से अपनी तैयारी कर रह होगे ,और पिछली क्लासों को अपने अच्छे से देखा होगा| दोस्तों इससे पहले क्लास में मैने आपको रेगुलेटिंग एक्ट और पिट्स इंडिया एक्ट के बारे में डिटेल से बताया था ,अगर आपने वो क्लास अभी तक नही देखी तो जरुर देखे | तो दोस्तों शुरु करते है आज का अपना टॉपिक जों है 1786 के अधिनियम, 1793 और 1813 के चार्टर एक्ट के बारे में |
1786 का विशेष अधिनियम-:
वारेन हेस्टिग को गवर्नर पद से हटाने के बाद , ब्रिटिश संसद ने लार्ड कार्नवालिस को भारत आने को कहा | जों 1776 में अमेरिका में हुई क्रांति में ब्रिटिश की ओर से प्रमुख था | जिसमे यह हार गया था |
अतः कार्नवालिस भारत आने को राजी हुआ , परन्तु कुछ शर्तो पर -
1. सभी शक्तियां कार्नवालिस के पास रहेगी | वह कोई भी निर्णय स्वतंत्रता से ले सकता है |
2. गवर्नर जनरल को प्रधान सेनापति बनाया गया | ताकि सेना की पूरी शक्ति गवर्नर जनरल के पास रहे |
3. गवर्नर जनरल को परिषद के निर्णय को रद्द करने की शक्ति दी गई | यह वह परिषद थी जों रेगुलेटिंग एक्ट के द्वारा बनाई गई थी और इसे गवर्नर के कार्यकारी परिषद कहा गया था | इसमें आरम्भ में 4 सदस्य थे |
# इस समय ब्रिटेन के राजा जार्ज तृतीय थे |
# बंगाल के गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस थे |
# कार्नवालिस द्वारा कार्नवालिस कोड जारी किया गया |
# कार्नवालिस द्वारा स्थायी बन्दोबस्त किया गया |
# कार्नवालिस द्वारा भारतीय नागरिक सेवा की स्थापना की गई | जिसके कारण कार्नवालिस को भारतीय नागरिक सेवा का जनक कहा गया |
# 1805 में गाजीपुर (उत्तरप्रदेश) में कार्नवालिस की मृत्यु हुई |
नोट- कार्नवालिस पहला गवर्नर जनरल था जिसकी समाधि भारत में है |
1793 का पहला चार्टर अधिनियम-:
प्रावधान-
# ईस्ट इंडिया कम्पनी के अधिकारों को 20 वर्षो के लिए बढ़ा दिया गया |
# ब्रिटिश अफसरों का वेतन भारत राजस्व से दिया जाने लगा ,जों पहले ब्रिटेन से दिया जाता था |
# 21 अप्रैल 1793 को ICS ( भारतीय नागरिक सेवा ) की स्थापना की गई |
# ईस्ट इंडिया कम्पनी को व्यापारिक अनुमति प्रदान करने की अनुमति दी गई | मतलब अगर ईस्ट इंडिया कम्पनी चाहे तो वह किसी और कम्पनी को भारत में व्यापार करने की अनुमति दे सकती है |
1813 का चार्टर अधिनियम-:
# इस समय ब्रिटेन के राजा जार्ज तृतीय ही थे |
# इस समय बंगाल के गवर्नर मिंटो प्रथम बने |
प्रावधान-
# ईस्ट इंडिया कम्पनी के व्यापारिक अधिकारों में कमी लाई गई |
# प्रसासनिक एकाधिकार को 20 वर्षो तक बढ़ाया गया |
# ईस्ट इंडिया कम्पनी को केवल 3 चीजो का व्यापार करने का एकाधिकार दिया गया -
1. चाय का व्यापर
2. चीन के साथ व्यापर
3. अफीम का व्यापर
इसका मतलब यह था कि अब इन 3 चीजों को छोडकर भारत में व्यापार करने के लिए कोई भी अन्य कम्पनी आ सकती थी | जिसमे ईस्ट इंडिया कम्पनी कोई हस्तक्षेप नही कर सकती थी |
# इसी एक्ट द्वारा भारत में अन्य ब्रिटिश कंपनियों को व्यापार करने की अनुमति मिली |
# इसी समय पहली बार शिक्षा के लिए 1 लाख रुपये खर्च किये गये ,क्योकि कंपनियों को अपने लिए क्लर्क की आवश्यकता थी |
# भारत में इसाई धर्म प्रचार करने की अनुमति दे गई और इनका मुख्यालय कलकता में बनाया गया |
तो दोस्तों ये था आज का अपना टॉपिक , उम्मीद करता हु आपको अच्छे से समझ आया होगा | अगर आप इन टॉपिक का अच्छे से रिवीजन करते है | तो आप किसी भी एग्जाम को पास आसानी से कर सकते है | अतः शेयर करे और अपनी तैयारी अच्छे से करे |
धन्यवाद

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