दोस्तों आज हमारा polity का दूसरा लेक्चर है | उमीद है अपने पहला लेक्चर देख लिया होगा और अगर नही देखा है तो जरुर देखे आपको हर एग्जाम चाहे कोई भी हो UPSC लेवल मैने इसमें add किया है |इस पढकर आप कोई भी एग्जाम आराम से कर सकते हो |तो दोस्तों शुरु करते है -
1765 एक संधि हुई जिसे इलाहाबाद संधि कहा जाता है | यह संधि रोबर्ट क्लाइव व आलम शाह 2 और शिरौदोला के बीच हुई | जिसमे कहा गया के टैक्स वसूलने के सारे अधिकार अंग्रेजो के पास रहेगे | और इसी के साथ बंगाल में द्वैध शासन लगाया गया |
द्वैध शासन में एक हिस्सा ईस्ट इंडिया कम्पनी लेती और दूसरा हिसा बंगाल का नवाब राय दुर्बल और राय दुर्बल को उसके हिसे का 81% हिस्सा ईस्ट इण्डिया कम्पनी को देना पड़ता था |
क्योकि रोबर्ट क्लाइव गलत तरीके से शासन कर रहा था तो यह बात ब्रिटिश संसद तक पहुची और वहाँ उसे जमकर जलील किया गया | अतः तंग आकर उसने खुदखुशी कर ली |
अब ब्रिटेन पर यूरोप का दबाव हुआ और उन्होंने कहा की आप भारत में गलत तरीके से शासन कर रहे है |
अब ब्रिटिश संसद ने बंगाल का नया गवर्नर बनाकर भेजा -वारेन हेस्टिगस | इसने द्वैध शासन को समाप्त किया और कलेक्टर पद बनाये | यही से भारत का सवैधानिक इतिहास शुरु हुआ |
भारत का सवैधानिक इतिहास (1773-1947)
हम इसे दो भागो में पढ़ सकते है -
1. ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा (1773-1853)
2. ब्रिटिश क्राउन द्वारा (1853-1947)
1. ईस्ट इंडिया कम्पनी (1773-1853)
# रेगुलेटिंग एक्ट 1773
# एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट 1781
# पिट्स इंडिया एक्ट 1784
# 1786 का अधिनियम
# चार्टर एक्ट 1793
# चार्टर एक्ट 1813
# चार्टर एक्ट 1833
# चार्टर एक्ट 1853
2. ब्रिटिश क्राउन द्वारा (1853-1947)
# भारत शासन अधिनियम 1858
# भारत परिषद अधिनियम 1861
# भारत परिषद अधिनियम 1892
# मार्ले मिंटो सूधार 1909
# माटेग्यु चेम्सफोर्ड सूधार 1919
# भारत शासन अधिनियम 1935
# अगस्त प्रस्ताव 1940
# क्रिप्स मिशन 1942
# बेवल योजना 1945
# शिमला सम्मेलन 1945
# केबिनेट मिशन 1946
# माउटबेटन योजना 1947
नोट-: ये सभी अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा बनाये जाते थे| उन्हें भारत में लागु करना ईस्ट इण्डिया का काम था |परन्तु बाद में शासन खुद अपने हाथो में लेने के बाद ये खुद कानून बनाते और खुद ही लागु करते थे |
रेगुलेटिंग एक्ट -: 1773
# यह एक्ट ब्रिटिश संसद द्वारा बनाया गया|
# इस समय ब्रिटेन के राजा- जार्ज तृतीय |
# इस समय ब्रिटिश के प्रधानमंत्री-लार्ड नार्थ |
# इस समय बंगाल का गवर्नर-लार्ड वारेन हेस्टिंग्स
लाने के कारण-
# भ्रष्टाचार बहुत अधिक फैैल गया था |
# कम्पनी की स्थिति दयनीय हो गयी थी ,क्योकि कम्पनी के कर्मचारी कम्पनी के लिए व्यापार न करके अपने खुद के लिए व्यापार कर रहे थे |
# कम्पनी की स्थिति इतनी खराब हो गई थी की इन्होने ब्रिटिश संसद से 10 लाख पोंड कर्ज माँगा|
इसलिए ब्रिटिश संसद ने रेगुलेटिंग एक्ट लगाया |
प्रमुख प्रावधान-
# बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल बनाया गया |
# 1773 तक पश्चिमी बंगाल,मद्रास,मुंबई में अलग-अलग गवर्नर जनरल थे | परन्तु अब बंगाल के गवर्नर जनरल को HEAD बना दिया और दोनों गवर्नर उसके नीचे लगा दिए |
# 4 सदस्यों की कार्यकारी परिषद बनाई गई |
# 20 वर्षो का एकाधिकार ईस्ट इंडिया कम्पनी को दिया गया |
# 1774 कोलकाता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई|और उसके प्रधान न्यायाधीश एलिजा एम्पेे को बनाया गया | इसके अलावा तीन और थे - चेबर्स, लेमिस्टर, हाईड |
# निजी व्यापार पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया |
महत्वपूर्ण नोट-:
# बंगाल का पहला गवर्नर - लार्ड वारेन हेस्टिग्स
# भारत का पहला गवर्नर - विलियम बेंटिक
# भारत का पहला वायसराय- लार्ड केनिन
# भारत का अंतिम वायसराय - माउन्ट बेटन
# स्वतंत्र भारत का पहला गवर्नर - माउंट बेटन
# स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर- सी.राजगोपालाचारी
मीर कासिम के दरबार में दो मंत्री थे -नन्द कुमार , चेतसिंह और इनके साथ घसीटी बेगम ,तीनो ने वारेन हेस्टिग्स के कुशासन का विरोध किया | इसलिए वारेन हेस्टिग्स ने इन पर मुकदमा चलाया और जेल भिजवा दिया |
वारेन हेस्टिग्स और एलिजा एम्पेे दोनों दोस्त थे | इसलिए हेस्टिग्स के कहने पर एलिजा एम्पेे ने तीनो को फाॅॅसी दे दी | जबकि तीनो बेगुनाह थे |इस बात का पता ब्रिटिश संसद को पता चला , उन्होंने हेस्टिग्स को बुलाया और उस पर महाभियोग चलाया , क्योकि उसने अपनी शक्ति का गलत प्रयोग किया था |
नोट -: पहला गवर्नर जनरल जिस पर महाभियोग चलाया गया - वारेन हेस्टिग्स |
एक्ट ऑफ़ सेटलमेंट -: 1781
यह एक्ट रेगुलेटिंग एक्ट की कमियों को ठीक करने के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा लाया गया , जिसे बंदोबस्त कानून भी कहते है |
प्रमुख प्रावधान-
# इस अधिनियम द्वारा सर्वोच्च न्यायालय पर रोक लगा दी गई की वह कम्पनी के कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही नही कर सकता |
# राजस्व सम्बन्धित मामलो से सर्वोच्च न्यायालय को बहार कर दिया गया |
पिट्स इंडिया अधिनियम -: 1784
# इस समय ब्रिटेन का राजा- जार्ज तृृतीय था |
# इस समय ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री- बिलिय पिट्स दी यंगर थे | इन्ही के नाम पर इस एक्ट को पिट्स इंडिया एक्ट का नाम दिया गया |
प्रमुख प्रावधान-
# ईस्ट इंडिया कम्पनी में द्वैैध शासन का आरम्भ |
#ईस्ट इण्डिया के कार्यो को दो भागो में बाॅॅट दिया गया - बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर और बोर्ड ऑफ़ कंट्रोलर
# बोर्ड आॅफ डायरेक्टर- कम्पनी के शेयरकर्ता थे , जो कम्पनी को चलाते थे ।
# बोर्ड आॅ फ कंट्रोलर- कम्पनी को कंट्रोल करने वाले थे , ताकि कम्पनी अपने मनमाने ढंग से पैसे न कमाए । इसमें 6 सदस्य होते थे । जिनकी नियुक्ति ब्रिटिश क्राउन करती थी । ये सदस्य सभी रिपोर्ट ब्रिटिश संसद को देते थे
# गवर्नर जनरल की परिषद में सदस्य संख्या 4 से 3 कर दी गई ।
# कोलकाता को पहली बार कम्पनी की राजधानी बनाया गया ।
तो दोस्तों ये था आज का अपना topic , उम्मीद है कि आपको अच्छा लगा होगा । ज्यादा से ज्यादा शेयर करें । सुरक्षित रहे ।
धन्यवाद

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