NCERT INDIAN POLITY IN HINDI
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राजव्यवस्था का परिचय | Introduction of polity |
राजनैतिक दर्शन | Political philosophy | -:
राजनीति की शुरुआत यही से हुई | यह ग्रीक (यूनानियों) की सोच थी | उस समय इनकी राजधानी एथेंस थी | यूनान में सबसे पहला नाम सुकुरात का आता है | इसी ने पहली बार Philosophy दी की राजा को कैसा होना चाहिये या उसे कैसे शासन करना चाहिए | परन्तु सुकुरात ने कभी कोई पुस्तक या ग्रन्थ नहीं लिखा |
राजनितिक विज्ञान | Poltical Science |
सुकुरात के एक शिष्य हुए प्लेटों | प्लेटों ने 2 महत्वपूर्ण काम किये | पहला इन्होने एक पुस्तक ‘रिपब्लिक’ (REPUBLIC) लिखी| दूसरा इन्होने एक शैक्षिणिक संसथान ‘The Academy’ खोली |
इसी संस्थान से इनका शिष्य अरस्तु (Aristotle) निकला | अरस्तु ने एक पुस्तक ‘पोल्टिक्स’ लिखी | इसलिए इन्हें राजनीति विज्ञान का जनक कहा जाता है
क्रम - सुकुरात - प्लेटों - अरस्तु
विज्ञान से राज व्यवस्था आई है |राजव्यवस्था का मतलब है -राज्य + व्यवस्था।
राज्य-:
राज्य की अनेकों परिभाषा आपने देखी होगी और पढ़ी होगी परन्तु वास्तविकता यह है की सन् 1933 ईo से पहले राज्य की कोई वास्तविक परिभाषा नहीं थी | यहाँ राज्य का मतलब देश से है | सन् 1933 ईo में मोटेविडो क्न्वेसन का आयोजन किया गया ( मोटेविडो, दक्षिण अमेरिका के देश उरुग्वे की राजधानी है जहाॅ यह आयोजन हुआ | यहाँ सभी देशों के प्रमुख इक्कठा हुए और सभी ने मिलकर राज्य की एक परिभाषा दी और यह परिभाषा 4 तत्वों के आधार पर थी |
1) भू-भाग
2) जनसंख्या
3) सरकार
4) संप्रभुता
जिस भी क्षेत्र के पास ये 4 चीजे थी वही राज्य था | Ex.भारत के पास भू-भाग है, जनसंख्या है, सरकार है और संप्रभुता है तो यह एक संप्रभु राज्य है ।
संप्रभुता मतलब है- निर्णय लेने की स्वतंत्रता । यानि जब भी कोई देश अपने आंतरिक और बाह्य निर्णय स्वयं लेने में सक्षम होता है तो वह संप्रभु होता है ।
अब प्रश्न है की क्या हमारा भारत 1947 ईo से पहले एक राज्य था ? उत्तर होगा नहीं क्योंकि भले ही भारत के पास भू-भाग ,जनसंख्या ,और सरकार थी ,परन्तु संप्रभुता नहीं थी। भारत सरकार अपने खुद के फैसले नही ले सकती थी
नोट-:
व्यवस्था-:
अगर व्यवस्था बनानी है तो उसके लिए नियमों की आवश्यकता होती है और जब नियमों को एक समूह में रखा जाता है तो वह संविधान कहलाता है, या बन जाएगा ।
संविधान की परिभाषा -:
किसी राज्य की व्यवस्था के लिए निर्मित मुलभुत क़ानूनों का समूह संविधान कहलाता है । ( The constitution of a set of fundamental laws designed to govern the system of state)
संविधान के प्रकार -:
1) दस्तावेज़ की प्रकृति के आधार पर
2) राजनितिक की प्रकृति के आधार पर
1. दस्तावेज़ की प्रकृति के आधार पर -: यह 2 प्रकार का है-
a) लिखित सविधान b) अलिखित सविधान
a) लिखित सविधान -:
ऐसा संविधान जो सभी नियमों को किसी एक पुस्तक में रखता है । जैसे- भारत का सविधान , अमेरिका का सविधान आदि।
नोट-: दुनिया का सबसे पहला लिखित सविधान अमेरिका का सविधान है ।यह 1789 ईo में लागु हुआ था, तब इसमें 7 अनु छेद थे।
b) अलिखित सविधान -:
ऐसा सविधान जो किसी एक पुस्क यासएक जगह पर नही लिखा है , जबकि वह अलग- अलग रूपों मेंहै | जैसे - ब्रिटेन सविधान , कनाडा सविधान , इजरायल सविधान , सऊदी अरब आदि ।
2. राजनिति की प्रकृति के आधार पर -:
a) एकात्मक सविधान b) संघीय सविधान
a) एकात्मक सविधान -: ऐसी शासन व्यवस्था जहा शासन का केवल एक ही स्तर हो | यहाँ सभी शक्तियां उसी केन्द्र के अधीन होती है | जैसे - ब्रिटिश का सविधान (ब्रिटेन) , फ़्रांस का सविधान ।
b) संघीय सविधान -: यह शक्तियो का विकेंद्रीकरण होता है | मतलब सबसे उपर एक स्तर होगा ,फिर उसके नीचे एक स्तर होगा | जैसे-अमेरिका सविधान , कनाडा सविधान , ऑस्ट्रेलिया सविधान (हमारे यहाँ तीन स्तर है) केंद्र सरकार - राज्य सरकार - प्रांतीय सरकार ।
महत्वपूर्ण तथ्य-:
1. दुनिया का सबसे बड़ा संविधान - यह 2 तरीके से बड़ा है ।
a) अनुछेद की संख्या b) शब्दों की संख्या ।
अतः दोनों में भारत बड़ा है | भारत के अनुच्छेद की संख्या 395 और शब्दों की संख्या लगभग 1.5 लाख है |
2. दुनिया का सबसे छोटा सविधान - USA अनुछेद की संख्या - 7। मोनाको शब्दों की संख्या -3814
3. दुनिया का सबसे नया सविधान - नेपाल . यह 20 सितम्बर 2015 को लागु हुआ |
भारत के वर्तमान संविधान की शुरुआत यूरोपियन कंपनियों से होती है | भारत में आई लोग और कंपनियों का क्रम-:
पुर्तगाल - एस्तादो द इं (1498)
ब्रिटिश - ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी (1600)
डच (नीदरलैंड) - डच ईस्ट इंडिया कम्पनी (1602)।
डेनिस - डेनिस ईस्ट इन्दिस कम्पनी (1616)।
फ़्रांस - फ्रेंच ईस्ट इंडिया कम्पनी (1664)।
वास्कोडिगामा 1498 ईo में भारत आया उसके साथ पुर्तगाल भी आये | अपनी कम्पनी बनाई- एस्तादो द इंडिया |
ये अपने साथ अपनी इन्वेस्टमेंट का 60 गुना भारत से लेकर यूरोप गये | जिससे पास के जो राज्य थे उनमें हलचल हुई और भारत के साथ व्यापार करने की सोची।
इसके बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी 1600 ईo में आई | उसके बाद डच (नीदरलैंड ) 1602 , डेनिस 1616 , फ़्रांस (1664) आये |
नोट -:
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी -:
इस कम्पनी की स्थापना 1600 ईo में हुई | इस समय ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ थी | उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी को 15 वर्षीय चार्टर (अधिकार पत्र ) दिया |
जिसका मतलब था की 15 वर्षो तक ब्रिटेन की एक ही कम्पनी (ब्रिटिश ईस्ट इंडिया ) भारत में व्यापार करेगी |
जब ईस्ट इंडिया कम्पनी भारत आई तो उस समय उतर भारत में मुग़लों का शासन था | इसलिए ये दक्षिण भारत से भारत में आये | और वह से व्यापार शुरू किया | मुगल शासक ओरगजेब के मरते ही मुगल वंश का Downfall शुरू हो गया और वे कमजोर होते रहे |
बंगाल इस समय अमीर राज्य था और मुग़लों के सूबेदार बंगाल में थे जो अब नवाब बन गये | मुर्शिद कुली खान (1713-1727) बंगाल का पहला नवाब था | इसके बाद 1740 ईo में घेरिया का युद्ध हुआ |
जिसमे सरफ़राज खान और उसी का सेनापति अली वर्दी खान आमने सामने हुए |अली वर्दी खान जीत गया |और 1740-1756 ईo तक रहा |
जों 23 लोग बचे थे उन्ही में से एक आदमी विलियम होल्वेल ने यह घटना लिखी |यह घटना ब्रिटन तक पहुची |अतः ब्रिटेन ने अब तय किया की अब तक वो व्यापर कर रहे थे परन्तु अब वो प्रशासन भी चलायेगे |
प्लासी का युद्ध -:
अब ब्रिटेन ने अपना एक गवर्नर बंगाल भेजा | जिसका नाम था रॉबर्ट क्लाइव | इसके बंगाल आते ही राबर्ट क्लाइव और शिराजुदोला के बीच 1757 में युद्ध हुआ ,जिसे प्लासी का युद्ध कहा जाता है |
2 घंटे के अंदर शिराजुदोला हार गया ,क्योंकि उसका सेनापति मीर जाफ़र और मंत्री राय दुर्लभ रॉबर्ट क्लाइव से मिल गये शिराजुदोला मारा गया
अब मीर जाफ़र (1757-1760) को नवाब बना दिया गया | इसके बाद मीर जाफ़र का दामाद मीर कासिम दामाद बना, परन्तु यह अंग्रेजों के अधीन काम करना नही चाहता था |
अब मीर जाफ़र (1757-1760) को नवाब बना दिया गया | इसके बाद मीर जाफ़र का दामाद मीर कासिम दामाद बना, परन्तु यह अंग्रेजों के अधीन काम करना नही चाहता था |
बक्सर का युद्ध -:
मीर कासिम ने दो सन्देश भिजवाए - एक भारत के मुगल बादशाह शाह आलम -2 को और दूसरा अवध के नवाब शुजौदोला को | तीनो ने मिलकर 1764 में इक युद्ध लड़ा -बक्सर का युद्ध | जिसमे अंग्रेजों का नेतृत्व हेक्टर मुनरो कर रहा था | अंगेज इसमें जीत गये |
इलाहाबाद संधि-:
1765 में एक संधि हुई -इलाहाबाद संधि |जो रोबर्ट क्लाइव और शाह आलम -2 व शुजदोला के बीच हुई |जिसमे कहा गया कि अब यहां टैक्स वसूली का अधिकार अंग्रेजों के पास रहेंगे और बंगाल मे द्वैध शासन की स्थापना की गई । अब अंग्रेजों के पास भू-भाग ,जनसंख्या , सरकार , और संप्रभुता आ गई । इससे अंग्रेजों को राज्य मिल गया । राज्य चलाने के लिए उन्होंने एक व्यवस्था बनाई और व्यवस्था नियम से बनती हैं।अतः इन्होने नियम बनाना शुरू किया । इन्हीं नियमों को अधिनियम कहा गया । जो ब्रिटिश संसद द्वारा बनाए जाते थे । यही से भारत की संविधानिक यात्रा शुरू हुई ।
आज के लिए इतना ही , मिलते है अपनी आने वाली क्लास मे ।अगर जानकारी अच्छी लगी तो शेयर जरूर करें ।
धन्यवाद ।

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