वैदिक काल(vedic period)

 

वैदिक काल(vedic period)

                                       



  सिन्धु सभ्यता के बाद वैदिक काल आया | बहुत से मत की सिन्धु सभ्यता के नष्ट होने का कारण आर्यों का आक्रमण था | परन्तु ऐसा नही है | 

आर्य अर्ध घुमंतू लोग थे और मध्य एशिया में केस्पियन सागर के आसपास के क्षेत्र से आये थे | उन्होंने खैैबर पास के मध्य से भारत में प्रवेश किया और सप्तसिंधु क्षेत्र (जहा सात नदियाँ बहती हो ) के पास जीवन शुरु किया | सबसे पहले आर्य पंजाब और अफगानिस्तान में बसे |

आर्यों द्वारा विकसित सभ्यता वैदिक सभ्यता कहलाई | आर्य अपने आपको श्रेष्ठ मानते थे | आर्यों की 36 जनजातियो में से केवल 5 जनजातिया भारत आई थी ,जिन्हें पंचजन्य कहा गया | 

 वैदिक काल को दो भागों में बाटाँँ जा सकता है-:                              
                                                                                                    1. ऋग्वेदिक काल (1500 Bc-1000 Bc) 
                                                                                                    2. उतर वैदिक काल (1000 Bc-600 Bc)

 इसी युग में वेदों की रचना वेदव्यास जी द्वारा की गई | वेद अपौरुषेेय है अर्थात मनुष्य द्वारा नही लिखे गये है |आर्यों की भाषा संस्कृत थी इसलिए वेदों को संस्कृत में लिखा गया |  

वेद शब्द का संस्कृत अर्थ 'श्रेष्ठ ज्ञान' है | 4 प्रमुख वेद वैदिक साहित्य का निर्माण करते है- ऋग्वेद ,यजुर्वेद , सामवेद , अथर्ववेद| ऋग्वेद को पहले लिखा गया जबकि बाकि के वेदों को उतर वैदिक काल में लिखा गया | 

ऋग्वेदिक काल (1500 Bc-1000 Bc)-: 

     


             
                                                         
इस अवधि में ऋग्वेद की रचना की गई इसलिए इसे ऋग्वेदिक काल कहा गया |
# ऋग्वेद में 10 मंडल, 1028 सुक्त, और 10462 ऋचाएँँ है |
# वेदों को पढ़ने वाले ऋषि को होतृृ कहा जाता है |
# ऋग्वेद का सबसे नया मंडल 1 और 10 वाँँ है |
# ऋग्वेद के सबसे पुराने मंडल 2 से 7 तक है | 
# ऋग्वेद के मिश्रित मंडल 8 वाँँ और 9 वाँँ है |
# ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित 'गायत्री मन्त्र' है |
# ऋग्वेद के 7 वे मंडल में दसराज युद्ध का उल्लेख है | 

दसराज युद्ध -:
                        यह युद्ध पुरुष्णी (रावी) नदी के किनारे लड़ा गया | यह युद्ध भरत के समय के ही एक राजा सुदास और 10 राजाओं के बीच हुआ | सुदास के गुरु वशिष्ठ और 10 राजाओं के गुरु विश्वामित्र थे |इसमें सुदास की विजय हुई |

वैदिक युग में राजनितिक संगठन -:                                     
                                                                                                   
# आर्यों की सभ्यता ग्रामीण थी |                                                                                                   
# इनकी मूल इकाई 'कुल' थी | कई परिवार मिलकर ग्राम का गठन करते थे | गावों के समूह को 'विश' कहा जाता था और इसका प्रधान विश्पति था |
# गाव का मुखिया 'ग्रामिणी' होता था |
# सबसे बड़ी प्रशासनिक व राजनितिक इकाई 'जन' थी , जिसके शासक को राजन कहा जाता था |
# गोचर भूमि का अधिकारी 'वाजपति' कहलाता था |
# अपराधियों को पकड़ने का काम 'उग्र' का था |
# सभा और समिति राजा को सलाह देने वाली दो संस्थाए थी | सभा श्रेष्ठ लोगो की , जबकि समिति आम लोगो की सभा थी |

वैदिक युग में समाज -: 
                                                                                                    
# ऋग्वेदिक समाज मूल रूप से पितृसतात्मक था | 
# समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार या कुल थी | जिसका मुखिया पिता था, जिसे कुलप कहा जाता था | 
# एक-विवाह प्रथा का प्रचलन था, जबकि शाही परिवार बहु-विवाह कर सकते थे | 
# बाल-विवाह एवं पर्दा-प्रथा नही थी |
# जीवन भर अविवाहित रहने वाली स्त्रियों को 'अमाजू' कहा जाता था |
# विधवा अपने पति के छोटे भाई से विवाह कर सकती थी |


रहन-सहन व खान-पान -: 

# आर्यों का मुख्य पेय-पदार्थ सोमरस था और यह वनस्पति से बनाया जाता था |
# आर्य मुख्य तीन प्रकार के वस्त्रों का उपयोग करते थे- 1. वास  2. अधिवास  3. उष्णीय |
# अंदर पहनने वाले कपड़ो को नीवि कहा जाता |
# मनोरंजन के साधन -संगीत , रथदौड , घुड़दौड , धुतक्रीडा , थे |


वैदिक युग में आर्थिक स्थिति-:

# आर्यों का मुख्य व्यवसाय पशुपालन और कृषि था |
# बढई रथ और हल का उत्पादन करते थे |
# श्रमिकों द्वारा तांबा, काँँसा, के साथ विभिन्न प्रकार के यंत्र बनाये जाते थे |
# सुनार गहने बनाते थे |
# कुम्हार घरेलू उपयोग के लिए विभिन्न प्रकार के बर्तन बनाते थे |
# वस्तु विनियम की प्रणाली थी परन्तु बाद में सतमान और निष्क मुद्रा (सोने के सिक्के) का उपयोग हुआ |
# आर्यों का प्रिय पशु घोड़ा था |
# आर्यों द्वारा खोजी गई धातु लोहा थी ,जिसे श्याम अयस् कहा जाता था |जबकि तांबे को लोहित अयस् कहा जाता था |
# व्यापर हेतु दूर दूर जाने वाला व्यक्ति को 'पणि' कहा जाता था |
# ऋण देकर ब्याज लेने वाला व्यक्ति 'सूदखोर' था |

वैदिक युग में संप्रदाय -:
                       
# आर्यों ने पृथ्वी, अग्नि, वायु, वर्षा जैसी प्राकृतिक शक्तियों की पूजा की |
# इंद्र सबसे लोकप्रिय देवता थे | 
# मनुष्य और देवता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देवता अग्नि थे |
# पवित्र पशु गाय थी | जिसे 'अध्न्या' न मरे जाने वाले पशु की श्रेणी में रखा गया | उसे घायल करने व हत्या करने वाले के लिए मृत्युदंड अथवा देश से निकलने की व्यवस्था की गई थी |
# न कोई मंदिर न कोई मूर्ति पूजा थी |
# ऋग्वेद में सरस्वती सबसे पवित्र नदी थी |
# ऋग्वेद में गंगा का 1 बार और यमुना का 3 बार उल्लेख है | इसमें सिन्धु नदी का उल्लेख सबसे अधिक बार है |

ऋग्वेदिक नदियाँ -: 


 

प्राचीन नदी

आधुनिक नदी

परुषणी

रावी

वितस्ता

झेलम

श्तुद्री

सतलज

आस्किनी

चिनाव

दृश्द्ती

घग्घर

विपाशा

व्यास

क्रुभ

कुर्रम

कुंभा

काबुल

सदानीरा

गंडक

गोमती

गोमल

सुवस्तु

स्वात

 



  


















ऋग्वेदिक देवता -: 


देवता

सबंद्ध

इंद्र

युद्ध का नेता व वर्षा का नेता

अग्नि

देवता और मनुष्य के बिच मध्यस्थ

वरुण

पृथ्वी व सूर्य का निर्माता

धो

आकाश का देवता

सोम

वनस्पति का देवता

उषा

प्रगति एव उत्थान का देवता

आश्विन

विपति हरने वाला देवता

पूषण

पशुओ का देवता

विष्णु

विश्व के पालनकर्ता

मरुत

आंधी-तूफान का देवता




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