हेलो दोस्तों स्वागत है आप सभी का, दोस्तों पहली क्लास में हमने ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सिद्धांतों के बारे में देखा था। आज हमारी दूसरी क्लास है जिसमें हम ब्रह्मांड को मापने की इकाईयों, बिग-बैंग अर्थात महा विस्फोटक सिद्धांत के बारे में जानेंगे ।
ब्रह्मांड की उत्पत्ति से संबंधित अवधारणाओं में बिग-बैंग यानी कि महा विस्फोटक सिद्धांत की मान्यता ज्यादा है। अब प्रश्न यह उठता है कि ऐसा क्यों है तो इसके निम्न कारण है-
बिग-बैंग को मानने के साक्ष्य-
1. एडविन हबल ने 1920 में बताया कि आकाशगंगाओं के मध्य दूरी लगातार बढ़ रही है। जिससे बिग बैंग का सिद्धांत मेल खाता है।
2. रेडशिफ्ट परिघटना जब भी कोई ऑब्जेक्ट हमसे दूर जाता है तो उसकी आवृत्ति कम होती जाती है और वह रेड दिखाई देने लगती है।
जब भी कोई ऑब्जेक्ट हमारे पास आता है तो उसकी आवृत्ति ज्यादा अर्थात बढ़ जाती है तो वह हमें ब्लू दिखाई देती है।
3. कॉस्मिक माइक्रोवेव रेडिएशन बैकग्राउंड-
यह सबसे पहले देखे गए प्रकाश के धब्बों या ब्रह्मांड का सबसे प्राचीनतम प्रकाश है। यह बिग-बैंग से उत्पन्न ऊर्जा प्रकाश का अवशेष है।
# इसे आरनो पोंजियस और रॉबर्ट विल्सन द्वारा खोजा गया।
बिग-बैंग अर्थात महाविस्फोटक सिद्धांत-
महा विस्फोटक सिद्धांत कहता है कि शुरू में ब्रह्मांड में उपस्थित सभी पदार्थ एक छोटे से बिंदु में समाहित था और इसका घनत्व तापमान और घूर्णन अनंत था।
इसी अनंत घनत्व और तापमान की वजह से आज से 13.8 अरब वर्ष पहले उस बिंदु में एक विस्फोट हुआ, और 1 सेकेंड के अंदर यह पदार्थ अरबों किलोमीटर तक फैल गया और 3 मिनट के अंदर पहला परमाणु अस्तित्व में आया।
बिग बैंग के 3.8 लाख साल बाद यह परमाणु नजदीक आए और मिलकर एक अणु का निर्माण किया।
3 मिनट के अंदर जो परमाणु अस्तित्व में आया था । उसी को हिग्स बोसोन का नाम दिया गया, क्योंकि उसको सबसे पहले भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस द्वारा खोजा गया था ।
सत्येंद्र नाथ बोस ने आइंस्टाइन को एक पत्र लिखा था। जिसमें यह सब बताया गया था और उसी आधार पर आइंस्टीन ने उस कण का नाम बोसोन रखा ।
परंतु ब्रिटेन के वैज्ञानिक पीटर हिग्स ने इसको सिद्धांतिक रुप दिया, इसलिए इसका नाम हिग्स-बोसान पड़ा।
# इसे लियोन लैंडरमैन ने God partial का नाम दिया।
हिग्स बोसोन-
# इसे ब्रह्मांड का मौलिक कण कहते हैं ।
# इसे गॉड पार्टिकल भी कहा जाता है ।
# ब्रिटिश वैज्ञानिक पिट्स हिग्स ने अपनी अवधारणा को प्रस्तुत किया जो भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस के बोसोन सिद्धांत पर आधारित थी ।
# 1964 में सर्न (जेनेवा) प्रयोगशाला में एक मशीन बनाई गई- लारज हैड्रोन कोलाइडर । इस मशीन में प्रोटोनों की टक्कर कराई गई और प्रोटोन तोड़ने की कोशिश की गई।
# 2010 में यह प्रयोग आरंभ हुआ और 2012 में एक तत्व की प्राप्ति हुई । परंतु यह हिग्स बोसान नहीं था । इसमें से यह और भी टूट सकता था और शायद फिर हिग्स-बोसोन की प्राप्ति हो जाएगी ।
# हिग्स-बोसोन को पदार्थ निर्माण की आधारभूत इकाई माना जाता है।
ब्रह्मांड मापने की दुरी इकाई -:
1. AU (Astronomical Unit) खगोलीय इकाई
2. LY (Light Year ) प्रकाश वर्ष
3. Parsec (पारसेक)
1. AU (Astronomical Unit) खगोलीय इकाई-
# पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दुरी को खगोलीय दुरी कहा जाता है |
# 1 AU = 1.5 * 10 की पॉवर 8 km या 1.5 * 10 की पॉवर 11 m |
2. LY (Light Year) प्रकाश वर्ष-
# 1 वर्ष में प्रकाश द्वारा तय की गई दुरी को प्रकाश वर्ष कहते है |
# प्रकाश द्वारा 1 साल में तय दुरी = 9.46 * 10 की पॉवर 12 km या 9.46 * 10 की पॉवर 15 m |
# ब्रह्मांड की सबसे उपयोगी इकाई प्रकाश वर्ष है |
3. Parsec (पारसेक)-
# पारसेक दुरी मापने की सबसे प्राचीन व बड़ी इकाई है |
# 1 पारसेक = 3.26 प्रकाश वर्ष
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