Jainism (जैन धर्म)
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Important information about jainism
(जैन धर्म के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी)
◆ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर (संस्थापक) ऋषभदेव थे ।
◆ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर अजीतनाथ थे ।
◆ जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर संभवनाथ थे ।
◆ जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक महावीर स्वामी को कहा जाता है ।
◆ जैन धर्म के कुल 24 तीर्थंकर हुए ।
◆ ऋषभदेव व अरिष्ठनेमी तीर्थंकरों का उल्लेख ऋग्वेद में किया गया है और अरिष्टनेमि श्रीकृष्ण के घनिष्ठ माने जाते हैं ।
Parsavanath (पार्श्वनाथ)-
■ पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे ।
■ ये काशी के इक्ष्वाकु वंश के राजा अश्वसेन के पुत्र थे।
■ उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सन्यास ले लिया ।
■ इनके द्वारा दी गई प्रमुख शिक्षाएं निम्न है- हिंसा न करना, सदा सत्य बोलना, अस्तेय (चोरी न करना) अपरिग्रह (संपत्ति न रखना) ।
Mahavir swami (महावीर स्वामी)-
■ जैन धर्म के अंतिम या 24वें तीर्थंकर थे ।
■ इन्हें जैन धर्म का वास्तविक प्रकार कहा जाता है।
■ इनका जन्म 540 ईसा पूर्व कुंडग्राम वैशाली में हुआ ।
■ इनके बचपन का नाम वर्धमान था ।
■ इनके पिता का नाम सिद्धार्थ था । जो ज्ञातक कुल के सरदार थे ।
■ इनकी माता का नाम त्रिशला था । जो लिच्छवी के राजा चेटक की बहन थी ।
■ उनकी पत्नी का नाम यशोदा था ।
■ इनके एक पुत्री थी, जिसका नाम अनोज्जा (प्रियदर्शनी) था ।
■ इनकी पुत्री का विवाह जामिल नाम के व्यक्ति के साथ हुआ ।
■ 30 वर्ष की आयु में भाई नंदीवर्धन से अनुमति लेकर सन्यास लिया ।
■ 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद जृम्भिक के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे इन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई ।
■ इन्हें जिन (विजेता), अर्हत (पूज्य) और निग्रंथ (बंधनहिन) कहा गया है ।
■ इन्होंने अपना प्रथम उपदेश राजगृह (राजगीर), बिहार में बितूलाचल पहाड़ी पर वाराकर नदी के तट पर प्राकृत भाषा में दिया ।
■ इनके अनुयायियों को निग्रंथ कहा गया ।
■ इनके प्रथम अनुयायी इनके दामाद जामिल बने।
■ उनकी प्रथम भिक्षुणी अनुयायी नरेश दधिवाहन की पुत्री चंपा बनी ।
■ इन्होंने अपने शिष्यों को 11 गणधरों में विभाजित किया ।
■ महावीर की मृत्यु 468 ईसा पूर्व पावापुरी (राजगीर), बिहार में हुई और इस समय राजगीर में मल्ल राजा सृष्टिपाल का शासन था ।
■ महावीर की मृत्यु के पश्चात प्रथम उपदेशक आर्य सुधर्मा बने ।
Features of jainism (जैन धर्म की विशेषताएं)-
◆ जैन धर्म पर सबसे ज्यादा प्रभाव सांख्यदर्शन का पडा ।
◆ जैन धर्म ईश्वर के अस्तित्व को नहीं मानता अर्थात यह अन्नीश्वरवादी है ।
◆ जैन धर्म आत्मा को मानता है ।
◆ यह पुनर्जन्म को भी मानता है ।
◆ यह कर्म को मानता है ।
Principles of salvation in Jainism (जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के सिद्धांत)-
1.त्रिरत्न
2.पंचमहाव्रत
3.सप्तभंगीमय
1.त्रिरत्न- सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक आचरण ।
2.पंचमहाव्रत- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचार्य
★ त्रिरत्न को प्राप्त करने के लिए पंचमहाव्रत की आवश्यकता होती है
3.सप्तभंगीमय/अनेकांतवाद/स्यादवाद-
इसमें कहा गया है कि कोई भी चीज सम्पूर्ण सत्य नहीं होती । हर एक सत्य सापेक्षित होता है अर्थात एक परिस्थिति में वह चीज सत्य और दूसरी परिस्थिति में वही चीज असत्य हो सकती है ।
Division of jainism (जैन धर्म का विभाजन)-
लगभग 300 ईसा पूर्व में मगध क्षेत्र में बहुत बड़ा अकाल पडा । जो लगातार 12 साल तक चला । इस समय यहां जैन धर्म के 2 प्रवर्तक भद्रबाहू और स्थूलभद्र रहते थे ।
भद्रबाहु अपने अनुयायियों को लेकर कर्नाटक चले गए । परंतु स्थूलभद्र अपने अनुयायियों के साथ मगध में ही रुक गए । अकाल के बाद जब स्थिति अच्छी हुई तो भद्रबाहू फिर से मगध आए ।
परन्तु भद्रबाहू और स्थूलभद्र के बीच मतभेद हुए और इसी मतभेद के कारण जैन धर्म दो भागों में बट गया । भद्रबाहू के अनुयायियों को दिगंबर कहा गया । जबकि स्थूलभद्र के अनुयायियों को श्वेतांबर कहा गया ।
Important facts (प्रमुख तथ्य)-
◆ जैन धर्म को मानने वाले राजा- हर्यक राजा उदयिन, मौर्य राजा चंद्रगुप्त मौर्य, कलिंग नरेश खारवेल और चंदेल शासक ।
◆ मैसूर के गंगवंश के मंत्री चामुंड ने कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में 10 वीं शताब्दी के मध्य में विशाल बाहुबली मूर्ति (गोमतेश्वर की मूर्ति) का निर्माण कराया ।
◆ मौर्य काल में मथुरा जैन धर्म का प्रसिद्ध केंद्र था।
◆ खुजराहो में जैन मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों द्वारा किया गया ।
◆ जैन तीर्थंकरों की जीवनी भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसुत्र में है ।
◆ महाराजा सृष्टिपाल के राज्य काल में महावीर स्वामी को निवार्ण प्राप्त हुआ ।
दोस्तो यह थी आज की अपनी क्लास । उम्मीद है आप सबको क्लास अच्छी लगी होगी । jainism की यह क्लास upsc लेवल तक आपको मदद करेगी । क्लास को शेयर करें और अगर आपकी पढ़ाई से संबंधित कोई भी समस्या है, तो उसे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें । धन्यवाद



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