रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI)

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) 

                                     


सामान्य जानकारी- 

■ 1934 में पहली बार RBI एक्ट पारित किया गया और 1 अप्रैल 1935 को  आरबीआई ने काम करना शुरू किया । 

■ 1937 तक आरबीआई का मुख्यालय कोलकाता में था । इसके बाद से इसका मुख्यालय मुंबई में है ।

■ पहली बार 1926 में 'यंग हिल्टन आयोग' की सिफारिश आरबीआई गठन के लिए की गई । 

■ केंद्रीय जांच आयोग दूसरा आयोग था । जिसने आरबीआई के गठन की मांग की । 

■ इसका मुख्य लक्ष्य देश में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बैंक नोटों के निर्गम को रेगुलेट करना है । साथ ही साथ मौद्रिक नीतियों को अपनाकर महंगाई को स्थिर रखना भी आरबीआई का कार्य है । 

■ आरबीआई के पहले गवर्नर सर ऑसबर्न स्मिथ (1935-1937) थे । 

■ आरबीआई के पहले भारतीय गवर्नर सी. डी. देशमुख (1943-1947) थे । 

■ सर बेनेगल रामा राव सबसे अधिक समय तक आरबीआई के गवर्नर रहे । 

■ आरबीआई के वर्तमान गवर्नर शशिकांत दास जी हैं ।


रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया निर्देशक मंडल-

आरबीआई निर्देशक मंडल को दो भागों में बांटा गया है 1. सरकारी निर्देशक 

2. गैर सरकारी निर्देशक

   

1. सरकारी निर्देशक- 

● इसमें 1 गवर्नर व 4 डिप्टी गवर्नर होते हैं । 

● इसमें कुल मिलाकर 5 सदस्य होते हैं ।


2. गैर सरकारी निर्देशक-  

● इसमें 10 भारत सरकार द्वारा नामित लोग होते हैं ।  

● 2 अधिकारी भारत सरकार के होते हैं 

● 4 क्षेत्रीय गवर्नर, जो मुंबई दिल्ली चेन्नई कोलकाता से लिए जाते हैं । 

● इसमें कुल सदस्यों की संख्या 16 होती है ।


आरबीआई के उद्देश्य- 

● भारत में महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाती है ।

● यह भारत की सभी वित्तीय संस्थाओं मुख्यत बैंकिंग और गैर बैंकिंग संस्था को नियंत्रण करती है ।

● मौद्रिक व साख नीतियों को लागू कर पैसे की तरलता को नियंत्रित करता है ।


मुख्य तिथियां-

● आरबीआई का लेखा वर्ष (अकाउंटिंग ईयर) 1 जुलाई से 30 जून तक होता है । 

● भारत का वित्तीय वर्ष (फाइनेंसियल ईयर) 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है ।

● भारत का एग्रीकल्चर ईयर (कृषि वर्ष) 1 जुलाई से 30 जून तक होता है ।


भारत में जो भी वित्तीय गतिविधियां हो रही है । उन्हें दो तरह से नियंत्रित किया जाता है- भारत सरकार द्वारा और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा ।


भारत सरकार द्वारा-

● भारत सरकार बजट द्वारा वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रित करती है, जिन्हें राजकोषीय नीति (fiscal policy) कहते हैं । 

● यह वर्ष में एक ही बार आता है । 

● इसमें परिवर्तन करना मुश्किल है ।

● यह जनता की क्रय शक्ति को सीधा प्रभावित करता है । 

● भारत सरकार की नीतियां संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करती है । 

● यह महंगाई व मंदी पर कारगर सिद्ध होती हैं ।


रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा- 

● आरबीआई मौद्रिक और साख नीति द्वारा वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रित करती है । 

● मौद्रिक और साख नीति 2 महीने में एक बार आती है यानी साल में यह 6 बार आती है ।

● इसमें परिवर्तन हर 2 महीने के बाद होता है 

● मौद्रिक नीति सीधा जनता पर असर ना करके बैंक आदि संस्थाओं को प्रभावित करती है । बाद में यह संस्थाएं जनता पर असर करती है । 

● आरबीआई की नीतियों का प्रभाव संगठित क्षेत्र में ज्यादा होता है, जबकि एक संगठित क्षेत्र पर इसका प्रभाव इतना ज्यादा नहीं होता । 

● आरबीआई महंगाई पर  कारगर सिद्ध होती है, परंतु मंदी पर इसका असर नहीं होता ।


आरबीआई का विधिक ढांचा-

सर्वोच्च अधिनियम-

■ भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम (1934)- रिजर्व बैंक के कार्यों पर नियंत्रण करता है । 

■ बैंककारी विनियम अधिनियम (1949)- वित्तीय क्षेत्र पर नियंत्रित करता है ।


विशेष कार्य को नियंत्रण करने के अधिनियम-

■ लोक ऋण अधिनियम (1944)- 

इसे सरकारी प्रतिभूति अधिनियम भी कहते है । सरकारी ऋण बाजार पर नियंत्रण । आरबीआई के पास यह अधिकार है कि  भारत सरकार को किसी प्रकार ऋण देना है या उसे नियंत्रण करना है ।

■ प्रतिभूति संविदा अधिनियम (1956)- 

सरकारी प्रतिभूति बाजार पर नियंत्रण । सरकार की सिक्योरिटी जो बाजारों में खरीदी में बेची जाती है (सरकार की सिक्योरिटी एक कागज है जिस पर सरकार कसम ले रही है कि मैं वादा करता हूं कि मैं धारक को इतने रुपए अदा करता हूं)। इसका एकाधिकार आरबीआई के पास है ।

■ भारतीय सिक्का अधिनियम (1980)- 

मुद्रा और सिक्कों पर नियंत्रण । आरबीआई को एकाअधिकार है कि उसे कौन सी मुद्रा जारी करनी है और बंद करने का भी का अधिकार आरबीआई को है ।

■ विदेशी मुद्रा अधिनियम (1973) व विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (1999)- 

व्यापार और विदेशी मुद्रा बाजार पर नियंत्रण ।


बैंकिंग परिचालन को नियंत्रित करने वाले अधिनियम-

■ कंपनी अधिनियम 1956 और 2013- 

कंपनी के रूप में बैंकों पर नियंत्रण

■ बैंकिंग कंपनी अधिनियम 1970/1980- 

बैंकों के राष्ट्रीयकरण से संबंधित


आरबीआई के कार्य- 

1. मौद्रिक प्राधिकारी- 

आरबीआई मौद्रिक और साख नीति को तैयार करता है । उसका कार्यान्वयन करता है और उसकी निगरानी करता है । जिसका उद्देश्य विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है । 


2. पूरी वित्तीय प्रणाली का विनियमक और पर्यवेक्षक- 

बैंकिंग परिचालन के लिए मापदंड निर्धारित करता है । जिसके अंतर्गत देश की बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली काम करती है । जिसका उद्देश्य प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना, जमा कर्ताओं के हितों की रक्षा करना और आम जनता को किफायती बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना है ।


3. मुद्रा जारीकर्ता- 

भारत में आरबीआई एकाधिकार के साथ करंसी जारी करता है, परंतु एक रुपए व उसे नीचे के सिक्के आरबीआई जारी कर नहीं करता । उसे वित्त मंत्रालय जारी करता है, क्योंकि वह टोकन अमाउंट माना जाता है। 

उस पर आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर नहीं होते बल्कि वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं । अगर कोई करंसी परिचालन के योग्य नहीं रहती तो उसे नष्ट करने का अधिकार भी आरबीआई को है । इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को अच्छी गुणवत्ता वाली करेंसी (नोटों और सिक्कों) को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना है


4. विदेशी मुद्रा प्रबंधक- 

विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (1999) का प्रबंध करता है । जिसका उद्देश्य विदेशी व्यापार और भुगतान को सुविधाजनक बनाना और भारत में विदेशी मुद्रा बाजार का क्रमिक विकास करना और उसे बनाए रखना है ।


5. विकासात्मक भूमिका- 

राष्ट्रीय देशों की सहायता के लिए व्यापक स्तर पर प्रोत्साहनात्मक कार्य करता है ।


6. सरकार का वित्तीय परामर्शदाता- 

किसी भी वित्तीय संबंध में परामर्श सरकार आरबीआई से ले सकती है । सरकार माने या ना माने इस पर कोई दबाव नहीं है ।


 दोस्तो यह थी आज की अपनी क्लास । उम्मीद है आप सबको क्लास अच्छी लगी होगी । क्लास को शेयर करें और अगर आपकी पढ़ाई से संबंधित कोई भी समस्या है, तो उसे कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें । धन्यवाद



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