बुद्ध और उसका धर्म (the buddha and his dharma)

बुद्ध और उसका धर्म (the buddha and his dharma)

 

हेल्लो दोस्तों स्वागत है आप सभी का , उम्मीद है आप सब अच्छे होगे और अच्छे से आपकी prepration चल रही होगी | दोस्तों पिछली क्लास में हमने देखा था की किस प्रकार उत्तर वैदिक काल में क्या-क्या हुआ और कैैसेे उत्तर वैदिक कालीन सभ्यता का रहन-सहन रहा | आज हम उससे आगे चलेगे और धार्मिक आंदोलनों के बारे में पढ़ेगे जों 600 ई0 पू0 ( जिसे बदलाव का युग भी कहा जाता है ) उदय हुए | तो दोस्तों शुरु करते है -


उत्तर वैदिक काल में अंधविश्वास ज्यादा फैल गया । जिससे पुरोहितो का वर्चस्व हो गया और जैसा वो बोलते वैैसा ही होता था । परन्तु 600 ई0 पू0 में धार्मिक आंदोलनों का उदय हुआ । और बहुत से संप्रदाय अस्तित्व में आये । परन्तु इनमे केवल 2 ही धर्म मुख्य बने- बुद्धिजम और जैनिजम।

गौतम बुद्ध-:

# बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध थे ।
# गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई0 पू0 में लुम्बिनी (कपिलवस्तु) नामक स्थान पर हुआ ।
# इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था ।
# इनके पिता का नाम शुद्धोदन था । जों शाक्य गणराज्य के शासक थे ।
# इनकी जन्म माता का नाम महामाया था । इनकी मृत्यु बुद्ध के जन्म के 7 दिन बाद हो गयी थी ।
# इनकी पालक माता का नाम प्रजापति गौतमी थी ।
# इनका विवाह 16 वर्ष की आयु में यशोधरा से हुआ और एक पुत्र हुआ जिसका नाम राहुल था ।

इनका जीवन अच्छे से चल रहा था । एक दिन ये अपने सारथी के साथ भ्रमण यात्रा पर निकले । रास्ते में इन्होने 4 व्यक्तियों को देखा था-
 पहला बुढा व्यक्ति , दूसरा बीमार व्यक्ति , तीसरा मृतक , चौथा सन्यासी | इन्हें बौद्ध धर्म में 4 महादृष्टांत भी कहा जाता है ।

यही से इनका मन परिवर्तन हुआ और इन्हें सन्यासी के अवस्था को अच्छी मानकर 29 वर्ष में आयु में घर का त्याग कर दिया ,जिसे बौद्ध धर्म में महाभिनिस्क्रमण कहा जाता है।

नोट- इनके पहले गुरु का नाम अलाराकलाम था । जिनसे इन्होंने संख्या दर्शन का ज्ञान लिया । इनके दूसरे गुरु रूद्रकारामपुत थे, जिनसेेेे इन्होंने योग की शिक्षा ली।

सिद्धार्थ को 6 वर्ष की कठिन तपस्या के बाद 35 वर्ष की आयु में वैशाख पूर्णिमा की रात निरंजना नदी के किनारे पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई और सिद्धार्थ को बुद्ध के नाम से जाना गया । ज्ञान प्राप्ति का स्थान बोधगया कहलाया ।



पहला उपदेश-

# महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी) में दिया । बौद्धधर्म में इसे धर्मचक्रप्रवर्तन कहा गया ।
# महात्मा बुद्ध ने अपने सभी उपदेश जनसाधारण भाषा 'पाली' में दिए ।
# इन्होने अपने अधिकतर उपदेश श्रावस्ती में दिए ।
# इनकी प्रथम महिला शिष्या प्रजापति गौतमी थी ।

बौद्ध धर्म के त्रिरत्न-

1. बुद्ध 
2. धम्म
3. संघ

पाँच महा-प्रतीक-

1. जन्म-  कमल
2. महाप्रस्थान- घोड़ा ( नाम- कंधक ) 
3. ज्ञानोदय- बोधिवृक्ष
4. पहला उपदेश - पहिया 
5. मृत्यु- स्तूप
                                       

बौद्ध साहित्य त्रिपिटक-

1. विनय पिटक
2. सुत पिटक
3. अभिधम्म पिटक

1. विनय पिटक- 

इसमें वे नियम और कानून है , जिनको महात्मा बुद्ध में बताया था अर्थात यह अनुशासन की किताब है ।

2. सुत पिटक-

इसमें स्वयं गौतम बुद्ध द्वारा दिए गये उपदेशो का संग्रह है । सुत पिटक का अर्थ है-सुत की टोकरी ।

3. अभिधम्म पिटक-

इसमें गौतम बुद्ध के सिद्धांतो का वर्णन है ।

नोट- ये तीनों पिटक पाली भाषा में है ।

चार बौद्ध परिषद -

पहली परिषद- 

# समय - 483 ई0 पू0
# स्थान - राजगृह ( बिहार )
# राजा - आजातशत्रु 
# अध्यक्ष - महाकश्यप
# परिणाम - विनय पिटक और सुत पिटक को लिखा गया।

दूसरी परिषद-

# समय - 383 ई0 पू0 
# स्थान - वैैशाली (बिहार)
# राजा - कालाशोका 
# अध्यक्ष - सब्बकामी
# परिणाम - पहली बार बौद्ध धर्म 2 सम्प्रदायों में टूट गया।
  1. स्थाविरवादी
  2. महास्न्धिक

तीसरी परिषद-
 
# समय - 250 ई0 पू0
# स्थान - पाटलिपुत्र (बिहार)
# राजा - अशोक 
# अध्यक्ष - मोग्ग्लिपुत 
# परिणाम - अभिधम्म पिटक को लिखा गया 

चौथी परिषद- 

# समय - 1 ई0
# स्थान - पाटलिपुत्र (बिहार) 
# राजा - कनिष्क 
# अध्यक्ष - वसुमित्र
# परिणाम - बौद्ध धर्म और दो सम्प्रदायों में टुटा ।
   1. हीनयान
   2. महायान 

1. हीनयान- 

# यह सम्प्रदाय बुद्ध के मूल शिक्षण में विश्वास करता है।
# ये मूर्ति पूजा में विश्वास नही करते है ।

2. महायान-

# यह सम्प्रदाय बुद्ध के स्वर्गाभास में विश्वाश करता है ।
# ये बुद्ध की मूर्ति पूजा करते है ।

बौद्ध धर्म की विशेषताएं-

◆  बौद्ध धर्म ईश्वर को नहीं मानता ।
◆  बौद्ध धर्म आत्मा मैं विश्वास नहीं रखता ।
◆  बौद्ध धर्म पुनर्जन्म की मान्यता को मानता है ।
◆  बौद्ध धर्म कर्म को मानता है ।
◆  बौद्ध धर्म मोड को पाने के लिए मध्यमवर्गीय मार्ग अपनाता है ।

=> तृष्णा या इच्छा क्षीण हो जाने की अवस्था को ही बुद्ध ने निवारण कहा है और निवारण ही बौद्ध धर्म का परम लक्ष्य है।
निवारण की प्राप्ति के लिए महात्मा बुद्ध ने दो मार्ग बताए हैं-
1. अष्टांगिक मार्ग 
2. दस शील मार्ग 

1. अष्टांगिक मार्ग-

◆  सम्यक दृष्टि 
◆  सम्यक संकल्प 
◆  सम्यक वाणी 
◆  सम्यक कर्मांत  
◆  सम्यक स्मृति
◆  सम्यक समाधि 
◆  सम्यक आजीव ( गलत तरीके से धन न कमाना)
◆  सम्यक व्यायाम

2. दस शील मार्ग-

◆  अहिंसा 
◆  सत्य 
◆  अस्तेय 
◆  अपरिग्रह (संपत्ति ना रखना) 
◆  मदिरा सेवन न करना 
◆  असमय भोजन न करना 
◆  धन संचय न करना 
◆  स्त्रियों से दूर रहना 
◆  नृत्य गान आदि से दूर रहना
◆  सुखप्रद बिस्तार पर न सोना

बौद्ध धर्म के अन्य तथ्य-

◆  गौतम बुध को एशिया का ज्योतिपुंज कहा जाता है। 
◆  गौतम बुध के घोड़े का नाम कंफर्म और सारथी का नाम चलना था ।
◆  इनके प्रथम अनुयाई तपस्वी और कालिख से अनन्य अनुयाई बिंबिसार प्रसेनजित अशोका आदि थे ।
◆  मूर्ति कला की दो शैली- मथुरा कला, गांधार कला थी। मथुरा कला शैली ने गौतम बुध की प्रथम मूर्ति बनाई।जबकि गांधार कला ने गौतम बुद्ध की अधिकतर मूर्तियां बनाई।

बुद्ध की मृत्यु-

महात्मा बुद्ध की मृत्यु मल्लों की राजधानी कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में 483 ई0 पू0 में 80 वर्ष की आयु में हुई।जिसे बौद्ध धर्म में महापरिनिवार्ण कहा जाता है ।


तो दोस्तों ये था आज का अपना टॉपिक , उम्मीद है आपको अच्छे से समझ आया होगा | दोस्तों अगर आप किसी भी तरह के एग्जाम की तैयारी कर रहे है तो आपके ये क्लास आपके लिए ही है , अगर आप अच्छे से पढाई करते है तो मुझे उम्मीद है कोई भी ऐसा प्रश्न नही होगा जों आपको नही आता होगा | साथ में MCQ जरुर लगाये जों मैै आपको साथ की साथ करवाता हुँँ | 
                                                                         धन्यवाद

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