बैंकिंग सिस्टम (बैंको का इतिहास और बैंको का वर्गीकरण)

 बैंकिंग

                             

बैंक की परिभाषा- 

पूरी वित्तीय व्यवस्था का एक ऐसा मध्य बिंदु जो इस पूरे विश्व बाजार में मुद्रा के आवागमन का कार्य करता है, बैंक कहलाता है।

बैंकों का इतिहास-

आधुनिक बैंकों का इतिहास भारत में यूरोपियों के आवागमन से शुरू हुआ । यूरोपीय इन संस्थाओं का प्रयोग पहले से ही करते थे । भारत आने पर उन्हें महसूस हुआ कि अगर वह व्यापार को सरल करना चाहते हैं तो भारत में ऐसी ईकाई होनी चाहिए । जो उनको आसानी धन उपलब्ध करा सके और उन्होंने बैंकों की स्थापना शुरू की । जो निम्न है-


1. भारत का सबसे पहला बैंक(1770)-

1770 ईस्वी में भारत का पहला बैंक, बैंक ऑफ हिंदुस्तान खोला गया और यह कोलकाता में स्थापित किया गया । यूरोपीय द्वारा इसे खोला गया, परंतु यह बैंक ज्यादा नहीं चला ।

2. बैंक ऑफ़ बंगाल(1806)-

ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1806 ईसवी में बैंक ऑफ़ बंगाल की स्थापना की और ईस्ट इंडिया कंपनी का यह पहला बैंक था । इससे पहले इस बैंक को बैंक ऑफ कोलकाता कहा जाता था ।

3. बैंक ऑफ बोम्बे(1840)-

1840 ईसवी में बैंक ऑफ बोम्बे की स्थापना ईस्ट इंडिया द्वारा की गई ।

4. बैंक ऑफ़ मद्रास(1843)-

1843 इसवी में बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना इंडिया कंपनी द्वारा की गई ।

5. इलाहाबाद बैंक(1865)-

इलाहाबाद बैंक की स्थापना 1865 ईसवी में की गई ।

6. अवध कमर्शियल बैंक(1881)-

इसकी स्थापना 1881 ईसवी में हुई । यह बैंक पहला बैंक था। जिसको प्रबंधन में पहली बार भारतीयों को शामिल किया गया था।

7. पंजाब नेशनल बैंक(1895)-

इसकी स्थापना 1895 ईसवी में हुई । यह पहला बैंक था जो पूरी तरह से भारतीयों द्वारा प्रबंधित था । भारतीय इसके मालिक नहीं थे परंतु इसे चलाने की कार्यवाही भारतीय करते थे ।

8. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया(1911)-

यह बैंक 1911 ईस्वी में खोला गया । यह भारत का पहला बैंक था जिसका स्वामित्व व प्रबंधन दोनों भारतीयों के पास था इसके स्वामित्व पोचखानवाला थे । और इसके पहले चेयरमैन फिरोजशाह मेहता थे ।

9. इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया(1921)-

1921 में 3 बैंक (बैंक ऑफ़ बंगाल, बैंक ऑफ़ मुंबई, बैंक ऑफ़ मद्रास) को जोड़कर एक कर दिया गया और इसे ही इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया कहा गया ।

10. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया(1955)-

इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार द्वारा अपने अधीन कर लिया गया और उसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और उसे 1955 में SBI (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) कहा गया । 1958 और 1959 में SBI के सहयोगी बैंकों (जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंदौर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला) आदि को भी राष्ट्रीयकृत किया गया ।


=> 1934 आते-आते काफी बैंक हो चुके थे । और धोखाधड़ी भी काफी अधिक बढ़ चुकी थी । अतः इन्हे रेगुलेट करना बहुत जरूरी हो गया था । इन्हें रेगुलेट करने के लिए 1934 में RBI Act पारित किया गया और 1 अप्रैल 1935 से आरबीआई ने काम करना शुरू किया और इस समय इसके मालिक निजी थे ।

=> 1 जनवरी 1949 को RBI का राष्ट्रीयकरण किया गया अर्थात यह भारत सरकार के अधीन कर लिया गया । मार्च 1949 में भारत सरकार ने बैंकिंग अधिनियम बनाया।

=> 1969 में 14 उन बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया। जिसकी न्यूनतम संपत्ति 50 करोड थी या इससे ज्यादा थी ।

=> 1980 में फिर से 6 बड़े बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया । जिनकी न्यूनतम संपत्ति 200 करोड या इससे ज्यादा की ।

=> 1993 में न्यू बैंक ऑफ इंडिया को पंजाब नेशनल बैंक से जोड़ा गया ।

=> 2008 में SBI के साथ स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र को जोड़ा गया ।

=> 2010 में SBI के साथ स्टेट बैंक ऑफ इंदौर को जोड़ा गया ।

=> 1 अप्रैल 2017 में SBI के बचे सहयोगियों को  (स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर) आदि को SBI में मिला दिया गया।

=> 2018 में विजया बैंक, देना बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा तीनों को बैंक ऑफ बड़ौदा में रखा गया ।


बैंकों का वर्गीकरण-

बैंकों का वर्गीकरण दो भागों में किया जाता है 

1. अनुसूचित बैंक (Scheduled Bank)

2. गैर अनुसूचित बैंक (Non Scheduled Bank)


1. अनुसूचित बैंक-

 # इन बैंकों को RBI के एक्ट 1934 में 2 अनुसूची में रखा गया है ।

# इन बैंकों पर RBI की मौद्रिक नीति पूरी तरह से लागू होती है ।

# इन बैंकों की आरबीआई पूरी तरह से मदद करता है ।

# उदाहरण - SBI आदि ।


2. गैर अनुसूचित बैंक- 

# यह बैंक RBI की 2 अनुसूची में नहीं है ।

# यह बैंक RBI की मौद्रिक और साख नीति को पूरी तरह से लागू नहीं करते ।

# RBI केवल आपातकाल में ही इनकी मदद करती है ।

# उदाहरण- जम्मू कश्मीर बैंक ।


=> अनुसूचित बैंकों का वर्गीकरण-

अनुसूचित बैंकों को  तीन भागों में बांटा गया है 

1. वाणिज्यिक बैंक (Comercial Bank)

2. कॉपरेटिव बैंक  (cooperative Bank)

3. क्षेत्रिय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Bank)


1. वाणिज्यिक बैंक- 

ऐसे बैंक जो लाभ के आधार पर काम करते हैं, उन्हें वाणिज्यिक बैंक कहते हैं ।

वाणिज्यिक बैंक को दो भागों में बांटा गया है 

1. निजी बैंक  (प्राइवेट बैंक)

2. सार्वजनिक बैंक  (पब्लिक बैंक)


निजी बैंक-

ऐसे बैंक जिसमें निजी लोगों का स्वामी तो होता है । सरकार का इसमें ज्यादा हस्तक्षेप नहीं होता । सरकार इसमें कुछेक प्रतिशत की हिस्सेदार होती है ।   

निजी बैंक को भी दो भागों में बांटा गया है 

1. स्वदेशी 

2. विदेशी


1. स्वदेशी बैंक-

ऐसे बैंक जिनका मालिक स्वदेशी (भारतीय) होता है, उसे स्वदेशी बैंक कहते है . जैसे- HDFC ,ICICI आदि ।

2. विदेशी बैंक-

ऐसे बैंक जिनका स्वामी दूसरे देश में हो उसे विदेशी बैंक कहते हैं । जैसे- SCB ((ब्रिटेन),  सिटी बैंक (यूएसए)


सार्वजनिक बैंक-

ऐसे बैंक जिसमें भारत सरकार की भागीदारी का 51% होती है और वे सरकार की देखरेख में चलते हैं, उन्हें सार्वजनिक बैंक कहते हैं ।


2. कॉपरेटिव बैंक-

 यह बैंक ऐसा बैंक है जो लाभ के उद्देश्य से काम नहीं करता । इनका उद्देश्य No profit No loss यानी कि न तो लाभ और ना ही हानि का होता है । जहां पर वाणिज्यिक बैंकों का लाभ नहीं मिलता । वहां यह बैंक खोले जाते हैं, ताकि वहां भी लोगों को लाभ मिल सके । 

कोऑपरेटिव बैंक का वर्गीकरण क्षेत्र के आधार पर किया जाता है जो निम्न है-

1. राज्य स्तरीय कोऑपरेटिव बैंक  (राज्य स्तर)

2. केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंक  (जिला स्तर) 

3. प्राथमिक साख समितियां  (ब्लॉक स्तर)


3. RRB बैंक-

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी वाणिज्यिक बैंकों की तरह होते हैं ।  परंतु यह बैंक ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों तक सीमित है । पहले इनकी संख्या अधिक होती थी , परंतु अब इन्हें अन्य बैंको से जोड़ा जा रहा है । RRB बैंकों का गठन  50% भारत सरकार,  35% स्पॉन्सर बैंक और 15% राज्य सरकार से होता है ।


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