Shaivism History

 History of Shaivism in Hindi 


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Introduction

                                       


■ भगवान शिव द्वारा संपादित धर्म को शैव धर्म कहा जाता है और भगवान शिव की उपासना करने वाले उपासकों को शैव धर्मी कहा जाता है ।

शैव संप्रदाय के लोग एकेश्वरवादी होते है । 
■ शैव मंदिर को शिवालय कहते है ।
■ शरीर में भभूति और राख लगते है और उसका तिलक भी लगाते है ।
■ ये अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करने के लिए कठोर योगाभ्यास और शारीरिक पीड़ा भी उठाते है।


Most important interesting facts about shaiv dhram (शैव धर्म के बारे में सबसे महत्वपूर्ण रोचक तथ्य)


सिंधु सभ्यता या हड़प्पा सभ्यता की site मोहनजोदड़ो से प्राप्त मुहर पर पशुपति का चित्रांकन मिला है । जिसे पता चलता कि यह भारत का सबसे प्राचीनतम धर्म है । भगवान शिव की उपासना का यह पहला प्रमाण है ।

■ Rigved (ऋग्वेद) में भगवान शिव को रुद्र , भेषजो का भेषज या चिकित्सकों का चिकित्सक कहा गया है ।


■ शिव नाम का सबसे पहला उल्लेख यजुर्वेद में मिलता है और इसी में भगवान शिव को शिव शंकर कहा गया है ।

■ अथर्ववेद में भगवान शिव को महादेव, भव, सर्व, भूपति और पशुपति के नाम से संबोधित किया गया है ।

■ ब्राह्मण ग्रंथों में भगवान शिव को सहसरास कहा गया है ।

■ मत्स्य पुराण में लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन मिलता है ।

■ श्वेताश्वर उपनिषद में भगवान शिव की भक्ति का उल्लेख है ।

■ Bhagavad gita (भागवद् गीता) में भगवान कृष्ण ने भगवान शिव को विश्व की आत्मा कहा है ।

■ दक्षिण भारत में भगवान शिव को बिरूपास, श्री पार्वती स्वामी, चित्रेश्वर कहा गया है ।

■ तैतरीय आरण्यक में रुद्र की पत्नी के रूप में माता पार्वती का उल्लेख है और माता पार्वती को पद्मा, पार्वती, उमा, गोरी, और भैरवी कहा गया है ।

■ राष्ट्रकूटों द्वारा एलोरा की गुफाओं में कैलाश मंदिर का निर्माण करवाया गया ।

■ कुषाण शासकों की मुद्रा पर त्रिशूल और नंदी की आकृति देखने को मिलती है ।

■ चोल राजा राजराज प्रथम ने तंजौर में राजराजेश्वरी मंदिर बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण करवाया ।

                                          


                                              


Most important one liner questions (महत्वपूर्ण प्रश्न)

 

1. प्रसिद्ध राजराजेश्वर मंदिर कहां स्थित है-तंजौर ।

2. लिंग पूजा का पहला स्पष्ट वर्णन कहां मिलता है- मत्स्यपुराण ।

3. ऋग्वेद में शिव को किस अन्य नाम से पुकारा गया है- रूद्र ।

4. लिंगायत समुदाय की स्थापना किसने की- अल्लभ प्रभु और उनके शिष्य बासव ने ।

5. एलोरा के प्रसिद्ध कैलाश मंदिर का निर्माण किसने करवाया- राष्ट्रकूटों ने ।

6. मैगस्थनीज ने अपनी यात्रा वृतांत में डायनोसिस नाम से किसका उल्लेख किया- भगवान शिव ।

7. लिंगायत संप्रदाय का मुख्य धार्मिक ग्रंथ क्या है- शुन्य संपादने ।

8. लिंगायत संप्रदाय प्रचलित था- दक्षिण में ।

9. पशुपति संप्रदाय के संस्थापक थे- लकुलीश ।

10. तंजौर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर मंदिर को अन्य किस नाम से जाना जाता है- बृहदेश्वर मंदिर ।

11. शिव महापुराण में कालामुख संप्रदाय के अनुयायियों को क्या कहा जाता है- महाव्रतधर ।

12. आजीवक संप्रदाय के संस्थापक कौन हैं- मक्खलि पुत्र गोशाल ।

13. शिव के किस महान उपासक ने सर्वप्रथम अपनी राज मुद्रा पर नंदी और त्रिशूल का आंकन करवाया- कुषाण राजा विमकडविसेस ।

14. शैव सिद्धांत के 4 पद कौन-कौन से हैं- विद्या, योग, कर्म, चर्चा ।

15. शैव सिद्धांत के 3 पदार्थ कौन से हैं- पशु, पाश, पति ।

16. शैव धर्म का सबसे प्राचीन संप्रदाय कौन सा है- पाशुपत संप्रदाय ।

17. पशुपात संप्रदाय को मानने वाले अनुयायियों को क्या कहा जाता है- पंचार्थिक ।

18. पशुपति संप्रदाय का प्रमुख सैद्धांतिक ग्रंथ कौन सा है- पशुपात सूत्र ।

19. कापालिक संप्रदाय का सबसे प्रमुख केंद्र कौन सा था- श्रीशैल ।

20. नाथ संप्रदाय को 10 वीं सदी में किसके द्वारा स्थापित किया गया- मत्स्येद्रनाथ ।

21. वीरशिव संप्रदाय किस संप्रदाय को कहा जाता है- लिंगायत संप्रदाय ।

22. तंजौर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर राम मंदिर का निर्माण किसने करवाया- कुषाण शासक राज राज प्रथम ने ।

23. किस काल में शैव धर्म अपने चरमोत्कर्ष पर पर था- गुप्त काल ।

24. कपालिक संप्रदाय के लोग किसे अपना इष्ट देव मानते हैं- भैरव ।

25. दक्षिण भारत में शैव धर्म का प्रचार किन संतों द्वारा किया गया- नयनार एवं अलवर ।

26. पल्लव काल में शैव धर्म का प्रचार-प्रसार किसके द्वारा किया गया- नयनार संतों द्वारा ।

27. नयनार संतों की संख्या कितनी बताई गई है- 63 ।

28. त्रिमुखी शिव का आंकन किस मुद्रा पर है- उज्जैनी मुद्रा ।

29. कुमारगुप्त की मुद्राओं पर किस देवता का आंकन मिलता है- कार्तिकेय ।


Development of shiva dhram (शैव धर्म का विकास)


Shaivism at the time of Nand dynasty 

(नंद वंश के समय शैव धर्म)

पाणिनी, जो महापद्मनंद के दरबार में रहते थे । वह एक शिव भक्त थे और उन्होंने कहा कि उनकी 'अष्टांगध्ययी पुस्तक' की रचना भगवान शिव की कृपा से हुई है ।


Shaivism at the time of Maurya dynasty

(मौर्य वंश के समय शैव धर्म)

■ मौर्य वंश में चंद्रगुप्त मौर्य शुरू में शैव धर्म का उपासक था । बाद में उन्होंने जैन धर्म को अपनाया ।

■ चाणक्य ने अपनी पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में कहा है कि नगर के मध्य में एक शिव सदन होना आवश्यक है ।

■ यूनानी राजदूत मेगास्थनीज, जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था । उसने कहा कि मेथोरा (मथुरा) के लोग हेराक्लीज़ और डायोनिसिस की पूजा करते है । यहाँ डायनिसिस भगवान शिव के लिए कहा गया है ।


Shaivism in the post-Mauryan period
(मौर्योत्तर काल में शैव धर्म)

■ कुषाण वंश में विमकडविसेस पहला शासक था, जिसने स्वर्ण मुद्राएं पहली बार चलाई और इस मुद्रा पर नंदी और त्रिशूल चिन्हित थे ।

■ उज्जैनी से एक मुद्रा मिली जिस पर त्रिमुखी शिव का चित्रांकन था ।

■ पहलव वंश के गाडोफर्नीज शासक के अभिलेख तख्त-ए-बही अभिलेख से पता चलता है कि गाडोफर्नीज की मुद्रा पर शिव का चित्रांकन था ।


Shaivism in the Gupta period 

(गुप्त काल में शैव धर्म)


■ प्रयाग प्रशस्ति लेख जो कवि हरिसेन द्वारा लिखा गया । यह भगवान शिव की आराधना से शुरू होता है । इससे पता चलता है कि हरिसेन शैवधर्मी था ।

■ चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) का मंत्री वीरसेन शैवधर्मी था । इसने पाटलिपुत्र में शिव मंदिर का निर्माण किया ।

नोट-  गुप्त काल में राज्य धर्म वैष्णव धर्म था । परंतु ऐसा नहीं था कि राजा का जो धर्म है, वही सब को अपनाना होगा । लोग स्वतंत्र अपने-अपने धर्म को अपना सकते थे ।


■ कालिदास के महान ग्रंथ अभिज्ञान शकुंतलम का प्रारंभ शिव स्तुति से होता है । इससे पता चलता कि कालिदास शैवधर्मी था ।

■ कालिदास का ही एक ग्रंथ कुमारसंभवम् है । जिसमें शिव पुत्र कार्तिकेय का वर्णन है ।

■ कुमारगुप्त की मुद्राओं पर कार्तिकेय का चित्रांकन दिखाता है कि कुमारगुप्त भी शैव धर्म ही था ।


■ दक्षिण भारत में पंचायतन पूजा प्रचलित थी । जिसमें मुख्य देवता शिव है और सहायक देवता विष्णु, गणेश, शक्ति और ब्रह्मा है । मतलब अगर शिव को प्राप्त करना है तो पहले इन देवताओं की पूजा करनी होगी ।

■ इसी पंचायतन पूजा से स्थापत्य कला का जन्म हुआ और पंचायतन शैली का निर्माण हुआ ।

■ गुप्त वंश में निर्मित देवगढ़ का दशावतार मंदिर पंचायतन शैली का मंदिर है परंतु इसके मुख्य देवता विष्णु हैं ।


Shaivism in the post-Gupta period 

(गुप्तोत्तर काल मैं शैव धर्म)


■ वर्धन वंश में राजा हर्ष को परम महेश्वर की उपाधि दी गई । जिससे पता चलता कि वह शैवधर्मी था ।

■ बाणभट्ट के अनुसार थानेश्वर के लोग शिव की पूजा करते थे और शिव को ही मुख्य देवता मानते थे ।

■ चीनी यात्री हेनसांग जो हर्ष के दरबार में आया था । उसने प्रयाग महामोक्ष परिषद में बताया कि हर्ष ने सूर्य, बुद्ध और शिव की मूर्तियां स्थापित की थी ।

■ हर्ष के समय कामरूप (असम) का शासक भास्कर वर्मा था और उसके अभिलेख ओम नमः शिवाय से शुरू होते हैं ।

■ हर्ष के समय बंगाल में गौण नरेश शशांक का शासन था और वह शैव धर्म का बड़ा अनुयायी था ।


Division of Shaivism 

(शैव धर्म का विभाजन)


वामन पुराण के अनुसार शैव धर्म को चार भागों में बांटा गया है- 

1. पशुपात शैव संप्रदाय 

2. कापालिक शैव संप्रदाय 

3. कालामुख शैव संप्रदाय 

4. लिंगायत शैव संप्रदाय


Number of shiv sampraday

(शिव संप्रदाय की संख्या)



1. पशुपात शैव संप्रदाय- 

• संस्थापक- लाकुलिश ।

• जिसे शिव के 18 अवतारों में से एक माना जाता है ।

• यह सबसे प्राचीन शैव संप्रदाय है ।

• इसके अनुयायियों को पंचार्थिक कहते हैं ।

• इस संप्रदाय का मुख्य ग्रंथ पाशुपत सूत्र है ।


2. कापालिक शैव संप्रदाय- 

• इसके इष्ट देव भैरव है ।

• इस संप्रदाय का प्रमुख केंद्र श्रीशैल था ।


3. कालामुख शैव संप्रदाय- 

• इनके प्रमुख वाइको महाव्रत घर कहा जाता है ।

• ये शरीर पर चिता की भस्म मलते है ।


4. लिंगायत शैव संप्रदाय- 

• दक्षिण में सबसे प्रचलित संप्रदाय ।

• इसका प्रमुख ग्रंथ शुन्य सम्पादने है ।

• इसके प्रवर्तक अल्लाभ प्रभु तथा उसके शिष्य बासव है ।

• इसका अन्य नाम जंगम, वीर शिव संप्रदाय है ।


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