Solar system (सौरमण्डल, सूर्य )

 

 हल्लों दोस्तों स्वागत है आप सभी का आपके अपने प्लेटफॉर्म AAPART STUDY पर । दोस्तों जैसे कि आप सभी जानते हैं, हम कर रहे हैं अपने आने वाले एग्जामो की तैयारी और मुझे उम्मीद है कि आप अपनी तैयारी अच्छे से कर रहे होंगे । हमने अपनी पिछली क्लास में हमारी आकाशगंगा ,तारे, ब्लैक होल आदि के बारे में डिटेल से पढ़ा । दोस्तों आज हम आगे बढ़ते हुए हमारे सौरमण्डल को पढ़ना शुरू करेंगे, जिसमें आज हम सूर्य के बारे में डिटेल से जानेंगे । तो चलिए शुरू करते हैं-


               Solar System (सौरमण्डल)  

सौरमण्डल का अर्थ है- सूर्य का मण्डल । सूर्य और उसके चारों ओर दीर्घ वृत्ताकार कक्षा में परिभ्रमण करने वाले ग्रह, उपग्रह, व अन्य असंख्य आकाशीय पिंड आदि के मंडल को सौरमण्डल कहते है ।

# सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल सौरमंडल का प्रमुख आकर्षक बल है।

# सौरमण्डल का 99.8%  द्रव्यमान अकेले सूर्य में समाया हुआ है । 0. 2% अन्य ग्रह, उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का आदि है ।

# हमारे सौरमण्डल में 8 ग्रह ( बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून ) है । जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं ।

# सूर्य के निकटतम 4 ग्रहों ( बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल ) को आंतरिक या लैंगिक ग्रह कहा जाता है और इन ग्रहों के बाद क्षुद्रग्रह की एक बेल्ट आती हैं जिसे क्षुद्रग्रह बेल्ट कहा जाता है । इस बेल्ट में असंख्य उल्का पिंड, क्षुद्रग्रह होते है । 

# सूर्य से दूरस्थ 4 ग्रहों ( बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून  ) को बाहरी या गैसीय ग्रह कहा जाता है । इन ग्रहों के बाद भी एक पट्टी आती हैं जिसे क्युपर पट्टी कहा जाता है । इसी पट्टी में बौना ग्रह प्लूटो रहता है ।


                     The Sun (सूर्य) -:

Most important interesting facts about sun (सूर्य के बारे में महत्वपूर्ण और रोचक तथ्य)



# सूर्य हमारे सौरमण्डल में स्थित एक तारा है । जो गर्म प्लाज्मा, जो चुंबकीय क्षेत्रों से गुथी हुई है , से बना हुआ है । इसे सौरमण्डल का मुखिया कहा जाता है ।

# हमारा सूर्य 75% हाइड्रोजन, 23.31 % हीलियम, 1.69%  आक्सीजन , आयरन आदि से बना हुआ है ।

# इसका व्यास 13.9 लाख कि•मी• ,यानि पृथ्वी का 109 गुणा है । 

# इसका द्रव्यमान 1.9×10  की पावर 30 kg (kilogram) , जो पृथ्वी का 3.3 लाख गुणा है ।

# इसका घनत्व 1.4×10 की पावर 8 घन कि•मी• , जो पृथ्वी का 13 लाख गुणा है ।

# सूर्य, सौरमण्डल के द्रव्यमान का 99.8% भाग घेरे हुए हैं ।

# हमारा सूर्य 4.5 अरब साल पुराना तारा है और इसकी उम्र लगभग 5.4 अरब साल बची हुई है । वर्तमान में यह पीले रंग का है । यह फैलता जाएगा और अंत में  लाल दानव बनेगा । जिससे पृथ्वी भी नष्ट हो जाएगी ।

# सूर्य, आकाशगंगा का चक्कर लगाने में लगभग  25 करोड़ वर्षों का समय लेता है ।

# सूर्य, पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ कि•मी• दूर है । जिसे 1 AU (Astronomical unit) कहा जाता है । सूर्य प्रकाश, पृथ्वी तक 8 मिनट 19 सेकंड में पहुँच जाता है ।

# सूर्य अपनी धुरी पर घूमकर 27 दिनों में 1 चक्कर पुरा करता है । सूर्य अपने अक्ष पर पूर्व से पश्चिम में घूमता है।जबकि हमारी पृथ्वी पश्चिम से पूर्व मे घुर्णन करती हैं ।
 
सूर्य जो पृथ्वी से देखने पर छोटा सा दिखता है यह बहुत ही विशाल है और इसकी कई परतें हैं । जो निम्न है- 

1. Core (अंतर भाग) 
2. Radiative zone (विकिरण क्षेत्र) 
3. Convection zone (संवहन क्षेत्र) 
4. Photosphire (दृश्य सतह) 
5. Chromosphire (वर्णमंडल) 
6. Corona (कोरोना) 

                                          

Image taken on nasa.tv 


1. Core (अंतर भाग)-

यहां सर्वाधिक ताप नाभिकीय प्रतिक्रियाओं से जन्मी ऊर्जा हाइड्रोजन से हिलियम मे परिवर्तित होती है। इसका तापमान 15 मिलियन या 1.5 * 10 की पावर 7℃ होता है। जिससे इसमें नाभिकीय संलयन होता है । जहां 4 हाइड्रोजन मिलकर एक हिलियम बनाता है। यही अवस्था प्लाज्मा होती है। यहां बहुत अधिक घनत्व पाया जाता है


2. Rediative zone (विकिरण क्षेत्र)-

कोर से ऊर्जा बाहर निकल कर इस क्षेत्र में आती है और यह ऊर्जा विद्युत चुंबकीय तरंगों के रूप में होती है। इस क्षेत्र से निकलने में इसे 1.7 लाख वर्ष लग जाते है।


3. Convection zone (संवहन क्षेत्र)-

इस क्षेत्र में ठंडे पदार्थ, गर्म की ओर व गर्म पदार्थ, ठंडे पदार्थों की ओर संवहन करते हैं । और चक्करीय रूप में घूमते हैं।

नोट- ये तीनों परत सूर्य की आंतरिक परत कहलाती हैं।


4. Photosphere ( दृश्य सतह)-

यह सूर्य की दृश्य परत है, जिसे हम देख सकते हैं । यहां का तापमान 5800k होता है। इसी भाग में छोटे छोटे दाने देखने को मिलते हैं, जिसे कणिकाएं कहा जाता है। यहां पर गहरे धब्बे मिलते हैं, जिसे सौर कलंक या sunspots कहा जाता है । इसका कारण सूर्य में ऊर्जा का स्थानांतरण होता है, जिसके कारण यह बनते हैं। 

                                            


इन धब्बों का तापमान (2700-4200) तक होता है । यह सूर्य की सबसे ठंडी जगह है। इन्हीं धब्बों से सौर तूफान आते हैं । जिसका प्रभाव हमारी पृथ्वी पर पड़ता है और ध्रुवों पर आरोरा की घटनाएं दिखाई देती है ।

नोट-  sunspots की खोज गैलीलियो द्वारा की गई।

5. Chromosphere (वर्णमंडल)-

इस सतह का तापमान 4000℃ से 20000℃ तक होता है। हाइड्रोजन की वजह से यह लाल रंग की दिखाई देती है। यह पूर्ण सूर्यग्रहण के समय दिखाई देती है।  यह डायमंड की अंगूठी या चंद्राकर आकृति जैसी दिखती है।


6. Corona (कोरोना)- 

यह सूर्य की सबसे बाहरी परत है। इसे सूर्य कीरीट या सूर्य मुकुट भी कहते हैं । इसका तापमान 1 मिलियन से लेकर 2 मिलियन डिग्री सेल्सियस तक होता है। यहीं से एक्स-रे किरणें निकलती है। यह भी पूर्ण सूर्यग्रहण के समय दिखाई देता है।


Important solar mission (महत्वपूर्ण सोलर अभियान)-

सोलर अभियान को हम दो भागों में बांट सकते हैं-

1. विश्व में

2. भारत में


1. वर्ल्ड के अभियान- 

◆ Pioneer 5- नासा द्वारा सूर्य का पहला मिशन (1960)

◆ Helios A- नासा (1974-1982) 

◆ Porker solar mission - नासा द्वारा 2025 तक कार्य करेगा। इसे टच द मिशन कहा गया है। (2018)

◆ SOHO- नासा और यूरोप स्पेस एजेंसी द्वारा (2020)

◆ ACE- नासा द्वारा 2024 तक रहेगा (1997)

◆ DSCOVR-  NASA+NOAA (2015)

solar orbitar- यूरोपीय स्पेस एजेंसी (2020)


2. भारत के अभियान-

◆ आदित्य-L1 (2022)


आदित्य L1-

 पहले इसका नाम आदित्य 1 था । परंतु अब इसका नाम बदलकर आदित्य L1 रखा गया है। जहां L का मतलब है- लैनग्राजी बिंदु। ब्रह्मांड में ऐसे 5 बिंदु हैं- L1, L2, L3, L4, L5 । 

लैनग्राजी बिंदु ऐसी जगह जहां कोई चीज स्थिर रह सकती है। उसे लैनग्राजी बिंदु कहते हैं। पृथ्वी और सूर्य के मध्य ऐसे 5 बिंदु हैं ।

L1 बिंदु पर किसी अंतरिक्ष यान को खड़ा करके उसका प्रक्षेपण किया जाएगा । L1 और पृथ्वी की दूरी 15 लाख किलोमीटर होगी। आदित्य L1 भारत का सूर्य के अध्ययन के लिए प्रथम मिशन है। यह एक टेलीस्कोप होगा । यह अंतरिक्ष में भारत का दूसरा टेलिस्कोप होगा। पहला एस्ट्रोसेट है । 

इसका उद्देश्य सूर्य के कोरोना, प्रकाशमंडल, वर्णमंडल हवा और तूफान का अध्ययन करेगा । मतलब यह सूर्य के  बाह्य परतों को अध्ययन करेगा । इसे PSLV xL से छोड़ा जाएगा ।


एस्ट्रोसैट मिशन-

इसरो (ISRO) द्वारा खगोलीय पिंडों के अध्ययन के लिए भारत की प्रथम अंतरिक्ष आधारित खगोलशाला । ऐसा करने वाला भारत चौथा देश बना । अभी तक अमेरिका, रूस, जापान ने अंतरिक्ष वेधशाला को लॉन्च किया है। एस्ट्रोसैट को पृथ्वी से 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर कक्षा में स्थापित किया है।

इसे 28 सितंबर 2015 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से PSLV c-30 द्वारा लांच किया । इसकी न्यूनतम कालावधि 5 वर्ष है। इसका उद्देश्य न्यूट्रॉन तारा व ब्लैक होल प्रक्रियाओं को समझना है ।


तो दोस्तों आज के लिए इतना ही, मिलते अपनी Next क्लास में । उम्मीद है कि आपको अच्छा लगा होगा और आपने अच्छे से समझा होगा । अगर हमारी जानकारी अच्छी लगी तो दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें ।

धन्यवाद 

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